Thursday, 26 June 2025

फिजियोथेरेपी सेंटर क्या कहेंगे इसे.. यातना गृह या सुधार गृह?

 फिजियोथेरेपी सेंटर

क्या कहेंगे इसे.. यातना गृह या सुधार गृह? 

कभी यहाँ बैठ कर देखें.. जितने भी लोग फिजियोथेरेपी करवाने आते हैं वो बहुत ज्यादा दर्द से गुजरते हैं। आपका केस जितना कॉमप्लिकेटेड है आपको उतना ही ज्यादा असहनीय दर्द सहना होगा। 

अब सबकी सहनशक्ति उतनी तो होती नहीं, तो कोई दर्द से रोता है, कोई जोर से चिल्लाता है, कोई दिल दहला देने वाली आवाज़ में चीखता है, तो कोई तो बिस्तर से ही नीचे कूद जाता है और कोई फिजियोथेरेपिस्ट को इतनी जोर से पकड़ता है कि कभी कभी या तो उसके नाखून उन्हें लग जाते हैं या कभी हाथ और पैर की मार। कुछ तो दर्द होने से डॉक्टर को धमकी तक दे डालते हैं। 

तो इस लिहाज़ से तो इसे यातना गृह कहना ही उचित लगता है। 

ये सच है कि जितने भी चेहरे मुस्कुराते हुये यहाँ आते हैं वो कराहते हुये बाहर जाते हैं। 

अब लोगों की प्रवृत्ति भी अलग अलग होती है। कई बहुत जल्दी हार मान लेते हैं। उनके लिए दर्द सह कर ठीक होने से ज्यादा सही दर्द से दूर रहकर जिंदगी भर पछताना होता है। तो वो आना बंद कर देते हैं। बिल्कुल नकारात्मक सोच वाले होते हैं ऐसे लोग। 

कुछ दूसरे कैटेगरी वाले दो तीन दिन के बाद आते हैं, ताकि दर्द थोड़ा भूल जायें। पर ऐसा करने से उल्टे जो भी सुधार हो रहा होता है वो रिवर्ट हो जाता है और उनका नुकसान ही होता है। 

लेकिन जिन्हें पता है कि ठीक होने के लिये और कोई विकल्प नहीं, वो कराहते जाते जरूर हैं, पर बिना नागा अगले दिन पुनः मुस्कुराते हुये यहाँ चले आते हैं और इस दर्द को  बिना शिकायत गले लगाने को सहर्ष तैयार रहते हैं। 

इस कैटेगरी के लोगों के लिये ये सुधार गृह है। वो ठीक होना चाहते हैं, उसकी कोशिश करते हैं, घबराते नहीं और रात के अंधेरे के बाद उन्हें सुबह की रोशनी भी हमेशा दिखाई देती है। ऐसे लोग सकरात्मक प्रवृत्ति वाले होते हैं। 

मैं भी इस तीसरे ग्रुप में शामिल हूँ। और हाँ, मेरी चीख या आवाज़ किसी के कानों तक न पहुंचे इसीलिए मुट्ठी और मुँह भींच कर दर्द को बहुत मुश्किल से पीती हूँ और कोशिश करती हूँ कि चीख न निकले। वहीं पर बैठे मेरे पतिदेव ने भी नहीं सुनी मेरी आवाज़। डॉक्टर के अनुसार मेरा केस बहुत ही जटिल है। तो जैसा कि मैंने बताया,जितना जटिल केस उतना ही ज्यादा दर्द का लेवल। मुझे अभी बिल्कुल पता नहीं और कितने दिन इस भयंकर पीड़ा से गुज़रना है।

फिर भी, मेरे लिये तो ये सुधार गृह है😊😊😊🙌🙌








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